# @author.nikhil.sachan on Instagram

- **Type:** Image
- **Original URL:** https://www.instagram.com/p/DUISjGbAKif
- **Gondola URL:** https://gondola.cc/posts/63455819-authornikhilsachan-instagram
- **Thumbnail:** https://img.gondola.cc/tr:w-,h-,fo-auto/postThumbnails/926a8ea311.jpg
- **Posted:** 2026-01-30T09:18:35.000+00:00
- **Account Owner:** Nikhil Sachan (@author.nikhil.sachan) — https://gondola.cc/author.nikhil.sachan

## Caption

घर से दफ़्तर के रास्ते में
स्टेशन के किनारे, एक मदारी बैठता है,

जिसका बंदर रोज़ डमरू की थाप पर 
अपनी बंदरिया को मनाने 
ठुमक ठुमक कर जाता है 
मैं उसका करतब देखने, रुक नहीं पाता 

क्योंकि मुझे घर से, सीधा,
दफ़्तर पहुंचना होता है

घर से दफ़्तर के रास्ते में
कनेर की फूलों की एक क्यारी है

जिसकी पंखुड़ियों पर तितलियाँ
उकड़ूँ बैठी शराब पीती हैं 
लेकिन उन्हें पकड़ने के लिए मैं रुक नहीं पाता 

क्योंकि मुझे घर से, सीधा,
दफ़्तर पहुंचना होता है

घर से दफ़्तर के रास्ते में
रोज़ माँ का कॉल आता है

वो जानना चाहती है, कि 
दिल्ली में ठण्ड पड़ रही है ?
या हो रही है बारिश
खाना खा रहा हूँ, ढंग से
और पी रहा हूँ दूध?
मैं इसका जवाब नहीं दे पाता

क्योंकि मुझे घर से, सीधा,
दफ़्तर पहुंचना होता है

घर से दफ़्तर के रास्ते में
और भी रास्ते हैं,
जो दफ़्तर नहीं जाते

पहाड़, नदी, जंगल
सिनेमा, सर्कस, थियटर
खेत, दरिया, बीहड़
और न जाने कहाँ-कहाँ तक जाते होंगे
लेकिन मैं कहीं और, जा नहीं पाता 

क्योंकि मुझे घर से, सीधा,
दफ़्तर पहुंचना होता है

सर झुकाकर, बुझी आँखों से, 
नाक के सीध में, 
घर से, सीधा, दफ़्तर पहुंचना
कितना ख़ौफ़नाक होता है

सीधा, कहीं भी पहुंचना
कितना अलग है
कहीं भी,
सीधा न, पहुँचने से !

#hindipoems #kavitayein #nayiwalihindi #poetsofinstagram #poemoftheday

## Stats

- **Views:** 0
- **Likes:** 3,526
- **Shares:** 0
- **Comments:** 99

## Tags

poetsofinstagram, nayiwalihindi, kavitayein, hindipoems, poemoftheday

---
Copyright (c) Gondola