पत्रकारिता का एक और किला ढह गया। भूमि आवंटन के शर्तों का पालन न करने पर UNI का दफ्तर कल देर रात खाली कर दिया गया। UNI और पीटीआई की स्थापना सरकार के सहयोग से देश भर के समाचार पत्रों को खबर भेजने के लिए की गई थी पीटीआई ने प्रोफेशनल रखा बनाया तो आज वहां नंबर एक एजेंसी बनी हुई है लेकिन UNI में हड़ताल धरने प्रदर्शन, बैनर पोस्टर और नकरापन के कारण आज स्थिति यह है यह की सरकार ने उसकी जमीन वापस ले ली। दिल्ली के दिल रफी मार्ग पर एलॉट की गई UNI की जमीन पर पहले ज़ी न्यूज़ और अन्य उद्योगपतियों की नजर थी उसके बाद स्टेट्समैन को दे दी गई। स्टेट्समैन यहां पर कुछ कमर्शियल एक्टिविटीज करने की प्लानिंग कर रहा था और कुछ कंस्ट्रक्शन भी शुरू हो गया था लेकिन सरकार को यह मंजूर नहीं था और इस ऑफिस को कल रात को पुलिस के लाठी डंडों के साए में खाली कर दिया गया। पत्रकारिता के ह्रास और को प्रबंधन का यह एक उदाहरण है।
पीटीआई की बिल्डिंग भी किराए पर है और वह भी लीज पर है। पीटीआई का एक बार सरकार से पंगा हो चुका है दूरदर्शन आकाशवाणी से PTI कि सर्विस खत्म की जा चुकी है।
यह इस बात की चेतावनी भी है कि अब पत्रकारिता का स्वर्ण...
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