डूबते सूर्य को नमन: जीवन चक्र का सम्मान
आज छठ महापर्व का सबसे महत्वपूर्ण दिन है, संध्या अर्घ्य। 36 घंटे के कठिन निर्जला व्रत के साथ, व्रती पवित्र नदी या घाट के जल में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य (डूबते सूर्य) को दूध और जल से अर्घ्य देते हैं। यह परंपरा हमें सिखाती है कि जीवन के हर चरण—चाहे वह उत्थान हो या पतन—का सम्मान करना चाहिए। डूबता सूर्य हमें बताता है कि हर अंत के बाद एक नई शुरुआत निश्चित है। यह अर्घ्य सूर्य देव की पत्नी, देवी प्रत्यूषा को भी समर्पित है, जो संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए दिया जाता है।
शुभ संध्या अर्घ्य!
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