3. 36 घंटे के महाव्रत का शुभारंभ
नहाय-खाय के बाद, खरना वह महत्वपूर्ण पड़ाव है जहाँ से छठ का कठिन और मुख्य चरण आरंभ होता है। खरना के प्रसाद को ग्रहण करने के बाद व्रती जल की एक बूँद भी नहीं लेते हैं। यह 36 घंटे का निर्जला उपवास व्रती के शारीरिक और मानसिक बल, दोनों की परीक्षा लेता है, जिसे वे अपनी अटूट श्रद्धा से पार करते हैं। खरना हमें यह सिखाता है कि शुद्धता और समर्पण ही सबसे बड़ी शक्ति है। आज के दिन सूर्य देव और छठी मैया सभी व्रतियों को उनके व्रत को सफलतापूर्वक पूर्ण करने का आशीर्वाद प्रदान करें।
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