facebook pixel
आस्था और शुद्धि का प्रवेश द्वार आज छठ महापर्व का दूसरा दिन, खरना है, जिसे 'लोहंडा' भी कहते हैं। यह दिन आत्मसंयम, पवित्रता और भक्ति का प्रतीक है। खरना के साथ ही व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला (बिना जल के) व्रत शुरू हो जाता है। पूरे दिन उपवास के बाद, शाम को गुड़ से बनी 'रसियाव' (खीर) और रोटी का पवित्र प्रसाद ग्रहण किया जाता है। माना जाता है कि इस प्रसाद को ग्रहण करने से व्रती को आगामी कठिन व्रत को पूरा करने की शक्ति मिलती है और इसी दिन छठी मैया घर में प्रवेश करती हैं। यह सिर्फ एक पूजा नहीं, बल्कि मन, विचार और कर्म की शुद्धि का महापर्व है। #छठमहापर्व #खरना #छठीमैया #पवित्रता #निर्जलाव्रत

 3

    Suggested Credits
    Tags, Events, and Projects