तुमने उस दरगाह का महल नहीं देखा ।
धर्मराज का तिल तिल का लेखा ।।
भाइयों हमारे इस शरीर के भीतर चित्रगुप्त बैठा है ... चित्र — आपके हर एक पल के कर्म को फ़िल्म की तरह रिकॉर्डिंग कर रहा है जो
धर्मराय के दरबार में हम देखेंगे।।
गुप्त — एक गुप्त तरीक़े से आपके कर्मों का लेखा जोखा लिख रहा है ।।
अब भी समय है सम्भल जाइये।।
सिर्फ़ admission
करा लेने मात्र से किसी को डिग्री नहीं मिल
जाती ।।
विद्यार्थी को मेहनत करना पड़ता है ।।
हर पल को बहुत गम्भीरता से उपयोग करना पड़ता
है ।।
चाहे कोई भी हो जगत या भगत पल पल का हिसाब
देना पड़ता है ।।
Sat saheb jiJagat Guru Rampal Ji Maharaj
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