कोटद्वार गढ़वाल में मालिनी नदी के किनारे महर्षि कर्णवा का आश्रम है इसी आशा में दुष्यंत और शकुंतला की मां का मुलाकात हुई थी। इनका पुत्र भारत हुआ था। इसी कर्णवाश्रम में भरत पैदा हुए, इन्हीं के नाम पर भारत पड़ा और महाभारत हुई
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