दीवारों पर लिखीं अनगिनत कहानियां, उन किस्सों का गवाह
मैं,
पश्चिम से पूरब को मिली आज़ादी, उस क्रांति की हवा मैं|
गलियां बदली, नाम बदले, बदले शासन भी, पर निडर वहीं
खड़ा मैं,
खून बहा जो वीरों का, उस साहस का बस एक टुकड़ा मैं|
तूफ़ान, बारिश में भी टूटा नहीं, निखरे रंगों सा खिला मैं,
सदा तिरंगा ऊंचा लहराता जहां, वहीं लाल किला मैं।👏☺
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