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#kavita #hindi #poetry #poet #poem #hindiquotes जब शान्ति ही अशांत हो। शब्द ही निशब्द हों। जल जब जलाए और आग जब बुझाए। सत्य ही लाचार हो और झूठ ही जब साथ हो। अंत का आभास हो पर लालचें प्रचंड हों। प्रकृति खिलाफ़ हो और भावना का नाप हो। क्रोध का विरोध हो और मौन की ही आस हो। न वृक्ष वो न जानवर, नासमझ इंसान वो, नासमझ इंसान वो।

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