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वो सहमा हुआ सा लड़का, जो आज काँच के दफ़्तर में, दबे सुर में “यस सर, जी सर” मिमियाता रहता है, एक वक़्त था जब वो आधी दुनिया को जूते की नोक पर रखता था। वो सहमा हुआ सा लड़का जो आज घर से दफ़्तर के अलावा, कहीं और नहीं जाता एक वक़्त था जब वो ऊँची साइकिल पर सवार होकर एक साँस में नाप लेता था पूरी धरती और दूसरी में नाप लेता था सारा आकाश। वो सहमा हुआ सा लड़का जो आज बस सर झुकाकर लैपटॉप में नज़रें गड़ाए रहता है एक वक़्त था जब वो नज़र उठाकर, घूरकर, अपने अंगूठे और उँगली के बीच सौ-सौ सूरज बुझा देता था। वो सहमा हुआ सा लड़का, जिसके सभी ख़्वाब, सूख कर आँख में काई की तरह जम चुके हैं एक वक़्त था जब दर्जन भर ख़्वाबों से उसकी आँखें पिचोला झील की तरह चमकती थीं। मैं मरने से पहले, बस देखना चाहता हूँ ये मंज़र कि वो सहमा हुआ सा लड़का, दुनिया को जूते की नोक पर रखने वाले उस बच्चे से, गले मिलकर, लिपटकर, छक कर रो ले और फिर दोनों मिलकर, राख कर दें इस काँच के मनहूस दफ़्तर को जहाँ वो बस मिमियाता रहता है यस सर, जी सर, यस सर। यस सर, जी सर, यस सर। #hindipoems #kavitayein #nayiwalihindi #poetsofinstagram #poemoftheda...

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