आंदोलन का यही अंजाम होना था। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी दवाई नहीं ले रहे हैं। अरविंद केजरीवाल का आंदोलन स्पष्ट था उन्हें राजनीति में आना था अन्ना को राजनीति में नहीं आना था इसलिए वह आंदोलन करके गौण हो गए। वांगचुक के आंदोलन में भी दूर दृष्टि नजर नहीं आ रही है एक मंत्री की स्थिति को लेकर ऐसा आंदोलन कोई नहीं करता पॉलीटिकल पार्टी भी शोर शराबा धरने प्रदर्शन करती है और चुप हो जाती है। वांगचुक को भी बड़े मुद्दे को लेकर बात करनी थी जिसमें कोई नीति पॉलिसी बनती।
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