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पहले से बेहतर बनने के लिए, बहूत बार टूँटना पडता है... फिरसे हथेली भरने के लिए, हाथों से बहूत कूछ छूँटना पडता है... चैन की साँस लेने के लिए, कई साँसे घूँटना पडता है... अगर लेना ही है हर एक सपने को बाहों मे, तो हर बार गिर कर फिर, राख से भी ऊठना पडता है... © निशब्द | Nishabd #writersofinstagram #trendingreel #support #explore #poem

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