ना राहत खरीद पाता हूँ,
ना गम की घड़ी बिकती है...
आरजू तो दिखती है,
मगर तकदिर ही नही दिखती है...
वो जिंदगी ही क्या जिसमे,
हर अरमान तकदिर बन जाए...
जिने के लिए वजह जरूरी है साहब,
काश मेरी हर आरजू,
वहीं जिने की वजह बन जाए...
© निशब्द | Nishabd
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