मंजिल...
तू कुछ कहे बिना ही तुझसे,
अपना सा सुकून मिलता है,
इस दिल्लगी के फासलों में दिल,
अनजानी हसरतों में जलता है...
फिर भी जज्बातों के हर तूफान को
अब तेरा ही साहिल है,
कौन सी भी राह
कौन सा भी रास्ता,
इस आखिरी सफर की
एक तू ही मंजिल है,
एक तू ही मंजिल है...
© निशब्द | Nishabd
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