लहर...
बेगानी ईस दूनियामें,
बस तू ही तो एक हमसाया है...
पूरे होश में हाथों से अपने,
दरीया किनारे मोहब्बथ का घर बसाया है...
तेरी प्यास का सैलाब ऊठे दिल मे,
फिरभी दरियासे ऊसे बूझाना सकू...
तू एक ही लहर है जो लगती है अपनी,
हर ख्वाहीश के साथ बस,
तूझी पर आकर रूकू...
© निशब्द | Nishabd
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