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सपनो भरी सूबह... फासलों में ईन सांसों को, चैन कहां आता है ? डाली से टूटी कली का जैसे, रंग उतर जाता है... तू है हर आरजू मेरी, तुझसे ही जज्बातों का आशियाँ... तू नहीं तो करती है बातें, मूझसे मेरी खामोशियाँ... आ मेरी इन खामोशियों को, तू अपनी जूबां दे दे... हूं लिपटा अंधेरे से, सपनों भरी एक सुबह दे दे... सपनों भरी एक सुबह दे दे... © निशब्द | Nishabd #writersofinstagram #trendingreel #support #explore #poem

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