आखिर क्या गुनाह था मोहनजीत जी का जिनका जीवन बर्बाद कर दिया, गुलजार सिंह जी का जिनको जान देकर कीमत चुकानी पड़ी। यही ना कि उन्होंने नशे के खिलाफ आवाज़ उठाई, पंजाब के युवा के भविष्य को लेकर सवाल पूछे।
केजरीवाल का 3 महीने में नशा खत्म करने का वादा कहाँ गया? खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान की विधानसभा के लोग नशे से त्रस्त हैं।
सवाल पूछना अगर गुनाह है, तो पंजाब की जनता अब वोट से जवाब देगी।
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