Out Now... Link in Bio... कौन हो तूम? © निशब्द | Nishabd - The Word Unspoken
कौन हो तुम?
कभी कभी कोई व्यक्ति हमारी ज़िंदगी में आता है और हमें समझ ही नहीं आता कि वह हमारे लिए इतना ख़ास क्यों हो गया। न कोई वादा हुआ होता है, न कोई रिश्ता तय हुआ होता है, न प्रेम का कोई इज़हार… फिर भी धीरे-धीरे उसका होना हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन जाता है। उसकी आवाज़ में सुकून मिलने लगता है। उसकी ख़ामोशी भी कुछ कहने लगती है। उसकी खुशी अपनी खुशी लगती है, और उसकी उदासी भीतर तक उतर जाती है। फिर मन में एक सवाल उठता है... आख़िर "कौन हो तुम?”
क्या तुम प्रेम हो? मेरी साँस हो या मेरी धड़कन? मेरी खुशी हो या मेरे आँसुओं की वजह? मेरी ज़रूरत हो, मेरी आदत हो, मेरी दुआ हो? या फिर मेरी आत्मा का वही हिस्सा, जिसे मैं बरसों से अनजाने में तलाश रहा था?
“कौन हो तुम?” इसी एक सवाल की तलाश में लिखी गई एक लंबी काव्य-यात्रा है।
यहाँ प्रेम केवल पाने का नाम नहीं है। यह उस रिश्ते की कहानी है, जहाँ बिना माँगे कोई अपना हो जाता है, बिना कहे कोई समझ आने लगता है और बिना किसी वचन के भी मन उसके साथ जीवनभर का रिश्ता महसूस करने लगता है।
कभी इस...
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